जौनपुर। देश की आज़ादी के 77 साल बीतने के बाद भी गांव-घर ख़ासकर ग्रामीणांचलों की औरतें और किशोरियां आज भी कई समस्याओं से जूझ रही हैं। महिलाओं को आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और अपने अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है, उन्हें घर और खेत दोनों की जिम्मेदारी उठाने के बावजूद सम्मान और फैसले लेने का अधिकार कम ही मिलता है। कई गांवों में आज भी महिलाओं को घरेलू हिंसा, गरीबी और बेरोज़गारी जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
किशोरियों की स्थिति भी चिंताजनक होती है। अच्छी शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है। कई किशोरियां आर्थिक मजबूरी के कारण पढ़ाई छोड़कर काम करने लगती हैं। ऐसे में जरूरी है कि गांव-घर, परिवार के विकास के लिए महिलाओं को बराबरी का अधिकार, शिक्षा और उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा व सुरक्षित वातावरण मिले।
उक्त बातें प्लस ट्रस्ट, दिशा फाउंडेशन, जौनपुर के तत्वावधान में हिंदी भवन के अजय सभागार में आयोजित तीन दिवसीय प्लस ट्रस्ट ग्रामीण महिला उद्यमी उड़ान फेलोशिप ओरियंटेशन वर्कशॉप माड्यूल में प्रतिभाग कर रहीं महिलाओं के बीच गूँजी। 17 जून से 19 जून 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय उड़ान फेलोशिप ओरियंटेशन वर्कशॉप माड्यूल में जौनपुर, मिर्ज़ापुर, आजमगढ़ एवं वाराणसी से आई हुई महिला, किशोरी प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम पूरी तरह से तीन दिवसीय आवासीय खुशनुमा माहौल में होने के साथ-साथ महिलाओं के शिक्षा, स्वालंबन और उन्नमुखी विकास को लेकर रहा। जहां महिलाओं किशोरियों ने खुलकर अपने विचारों को रखा।
जौनपुर के छितौना गांव से आई हुई पूनम देवी ने बताया कि, “महिलाओं को आज भी बंदिशों के बीच जीवन गुजारना पडता है। यहां तक कि उन्हें स्वयं के निर्णय लेने के लिए भी परिवार की निर्भरता पर रहना होता है।” वह कहती हैं कि, “बंदिशों का भी एक दायरा होना चाहिए न कि महिला के मौलिक अधिकारों और उसके मन-मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालने जैसी बंदिशें हों।”
मिर्ज़ापुर से आई प्रियंका ने अपने दर्द और स्वालंम्बन की राह चुनने के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार से उन्होंने परिवार की माली हालत को देखते हुए तथा बच्चों की अच्छी परवरिश की खातिर सिलाई-बुनाई के जरिये परिवार की गाड़ी को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि महिलाएं उम्मीदों को मरने ना दें, इधर-उधर की बजाए अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियों पर ध्यान दें मंजिल जरुर मिलेगी।”
इसी प्रकार अन्य महिलाओं ने भी अपने-अपने दर्द और वेदना के साथ अपने अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस-सत्र में प्रतिभागियों का रजिस्ट्रेशन तत्पश्चात परिचय सत्र हुआ। उसके बाद दूसरे व तीसरे सत्र में कुमारी सीमा ने प्लस ट्रस्ट उड़ान फेलोशिप क्या है? पर प्रकाश डालते हुए प्लस ट्रस्ट के कामों और फेलोशिप के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। पांचवें सत्र में जीवन नदी (स्वयं की जीवन यात्रा) पर सीमा एवं लाल प्रकाश राही ने अपने भीतर झांकने की स्थिति बनाने एवं स्वयं की यात्रा को नदी के माध्यम से दर्शाने और उस पर चर्चा करना सिखाया।
छठवें सत्र में प्लस ट्रस्ट टीम एवं एंकर व पूर्व फेलो द्वारा अपने अनुभवों की शेयरिंग करते हुए आनलाईन एवं आफलाइन प्रोजेक्टर के माध्यम से रिंकी देवी, पूनम व रीतू यादव ने बताया। सातवें सत्र में कुमारी सीमा व लाल प्रकाश राही ने फाइफ फिंगर एक्टिविटी (हैंड माड्यूल एक्टिविटी) के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वर्कशॉप के आठवें और नौवें सत्र में महिला उद्यमियों के लिए बाजार में स्पेस अवलोकन एवं शेयरिंग के लिए प्रतिभागियों ने आसपास के बाजार का अवलोकन करते हुए इसके उपरांत अपने अनुभवों को साझा किया। इस दौरान मोडरेट कुमारी सीमा, बिंदू यादव, रंजना तथा लाल प्रकाश राही रहे।
वर्कशॉप के दूसरे दिन शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों ने नौपेड़वा, बक्शा का भ्रमण करते हुए बक्शा ब्लाक के कृषि विज्ञान केंद्र का विजिट कराया गया, जहां प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती और इसके समुचित उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान देशी और जर्सी गाय के गोबर में क्या अंतर होता है बताया गया। खेत बचाओ अभियान, विकसित कृषि संकल्प अभियान, स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत पर जोर दिया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने आधुनिक पारंपरिक खेती, बकरी पालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन सहित अन्य की जानकारी प्राप्त करते हुए कांजी नेवादा (नौपेड़वा) में देशी ‘गूड़’ के जरिए स्वालंबन की कहानी सुना रही बैंक सखी सविता देवी से जानकारी प्राप्त की कि वह कैसे अन्यत्र से गूड़ मंगाकर उसके विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाकर बाजार में अपना प्रभाव कायम किए हुए हैं।
ऐंकर लालप्रकाश राही ने ‘उड़ान फेलोशिप ओरियंटेशन वर्कशॉप माड्यूल’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, “इस फेलोशिप के माध्यम से आपके (वर्कशॉप में प्रतिभाग कर रहे प्रतिभागियों) सपनों को उडान भरने के लिए यह एक छोटा सा प्रयास है, ताकि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर स्वालंबी बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि कम पूंजी में घर पर बैठकर घर के कामकाज और परिवार व बच्चों की नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए किफायती स्वरोजगार को बढावा दिया जा सकता है। बाजारवाद का दौर है बाजार हमें तय कर रहा है, इससे बचने के साथ हमें यह तय करना है कि हमारी जिंदगी कैसे बेहतर होगी।”
उन्होंने कहा कि कहने के लिए सरकार सरकारी नौकरी दे रही है (संविदा और आउटसोर्सिंग) लेकिन इनकी जिंदगी कितनी बदहाल है यह बता पाना मुश्किल है। आज आम आदमी बुरी तरह से परेशान है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि स्वालंबन और स्वरोजगार की इमारत कैसे व किस प्रकार से खड़ी करें।
गौरतलब हो कि जौनपुर का हिंदी भवन साहित्यिक और सांस्कृतिक कला का एक अनूठा विरासत स्थल है। जहां से साहित्य कला से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के नायको का नाता जुडा हुआ रहा है। ऐसे में हिंदी भवन सभागार में आयोजित तीन दिवसीय प्लस ट्रस्ट ग्रामीण महिला उद्यमी (उड़ान फेलोशिप ओरियंटेशन वर्कशॉप माड्यूल में प्रतिभाग कर रहीं महिलाओं, किशोरियों के लिए यह एक अनूठा और प्रेरणादायक कार्यक्रम भी रहा है। इस दौरान जौनपुर सहित पूर्वांचल कई जनपदों से चलकर आई हुई प्रतिभागियों ने अपने विचारों और अनुभवों को शेयर किया। तत्पश्चात महिला उघमियों की सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी सुनी गई कि किस प्रकार से गांव घर परिवार में रहते हुए स्वरोगगार को बढावा देते हुए महिला उघमी सफलता की कहानी कह रही है। कार्यशाला पर प्रतिभागियों का फीडबैग, एकल व्याख्यान के साथ ही साथ
कार्यशाला में कुछ महिलाओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए अपने उत्पाद के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने अपने हौसले को उड़ान दी थी। कार्यशाला के अंतिम दिन समापन अवसर पर लालप्रकाश राही एंकर, सीमा, पूनम, रिंकी, हदीसुन निशा, रजिया, करिश्मा, शोभना स्मृति राष्ट्रीय महिला अधिकार कार्यकर्त्ता, बिंदू यादव, पूनम, सिम्मी, नीलम, शिराज अहमद, आफाक, इत्यादि की मौजूदगी ने प्रतिभागियों को उनके हौसले को बुलंद बनाते हुए ज्ञान तकनीक से लेकिन विभिन्न स्वरोजगार के बारे में विस्तार से अवगत कराया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा करते हुए कुमारी सीमा एवं लाल प्रकाश राही ने सभी का आभार प्रकट किया।